Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 84, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
करोत्येव शिवस्येच्छा करोतीदमनाकृतेः ।
सैषा चितिरिति प्रोक्ता जीवनाज्जीवितैषिणाम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, इससे सिद्ध हुआ कि शिव की उक्त इच्छा ही कार्य करने में दक्ष है, अतः
समस्त आकार से रहित शिवजी की स्पन्दनशक्ितिरूपा इच्छा इस समस्त दृश्याभासका निर्माण
करती है । वही इच्छा अपने भीतर के चिदाभास के द्वारा दीप्त होकर जीवचैतन्य कही गई है,
क्योकि वही जीवनाभिलाषियों का जीवन है