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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 84, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 84, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 84 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

प्रकृतित्वेन सर्गस्य स्वयं प्रकृतितां गता । दृश्याभासानुभूतानां करणात्सोच्यते क्रिया ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

वही जगत्‌ के आकार में परिणत होती है, अतः समस्त सृष्टि की प्रकृति भी वही है, दृश्यों में (पदार्थ) प्रतीत होने वाले उत्पत्ति आदि विकारों का सम्पादन भी वही करती हे, अतः क्रियारूप भी वही हे