Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 85, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 85, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 85 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
ततो व्योमसमाकारा शिवस्यैवाकृतिं ततः ।
सा प्रविष्टा सरिच्छान्तसंरम्भेव महार्णवम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर अव्याकृत आकाश के सदृश आकारवाली हुई, फिर वह शिवजी
के आकार में उस प्रकार सब आडम्बर छोडकर प्रविष्ट हो गई, जैसे कि नदी समुद्र मे प्रविष्ट होती
है