Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 85, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 85, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 85 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
एक एवाभवदथो शिवया परिवर्जितः ।
शिव एव शिवः शान्त आकाशे शमनोऽभितः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर शिवा से रहित एकमात्र शिवजी ही बच गये । ये पूर्ववर्णित चिदाकाशरूप गगन
में सबका उपसंहार करनेवाले तथा सर्वप्रकार के उपद्रवो की शान्ति कल्याणात्मा शिवजी ही थे