Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 85, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 85, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 85 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
भगवञ्छिवसंस्पृष्टा सा शिवा परमेश्वरी ।
किमर्थमागता शान्तिमिति मे ब्रूहि तत्त्वतः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र ने कहा : भगवन्, शिवजी से स्पर्श की हुई भगवती शिवा कालरात्रि क्यों शान्त हो गई ?
यह मुझे तत्त्वतः बतलाइए