Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 85, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 85, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 85 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
शरशक्तिगदाप्रासमुसलादि शिलादि च ।
भावाभावपदार्थौघकलाकालक्रमादि च ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
बाण, शक्ति, गदा, भाला, मूसल आदि, शिला आदि, भाव, अभाव आदि
पदार्थसमूह तथा कला, काल के क्रम आदि भी उसीके भूषण हैं