Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 85, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 85, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 85 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
स्पृष्टमात्रे शिवे तस्मिंस्ततः परमकारणे ।
प्रवृत्ता प्रकृतिं गन्तुं सा शनैरुरजां तथा ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
हट जाने के अनन्तर
परमकारण एकमात्र शिवजी के स्पर्श से वह कालरात्रि धीरे-धीरे अपने अव्यक्तभाव को तथा
छोटेपन को प्राप्त होने लग गई