Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

कलधौतमयी स्फारा संध्याजलदसुन्दरी । ततोऽहं विस्मयाविष्टः प्रविचारितवान्पुनः ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीराघव, इसके बाद अत्यन्त आश्चर्य से युक्त होकर मैंने फिर उस शिला के दूसरे भाग के विषय में उसी प्रकार की दिव्यदृष्टि से विचार किया