Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
दृश्यते तच्छिलैवैका न तु सर्गादि किंचन ।
सावस्थिता शिलैवैकरूपा निविडमण्डला ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
घनमण्डलवाली वह सुवर्णमयी शिला एकरूप ही स्थित थी।
सन्ध्याकाल के मेघ के सदुश अतिसुन्दर एवं विशाल थी