Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
सर्वत्र सर्वदा सर्वं यदस्त्येव तदा तथा ।
दूरवत्प्रेक्ष्यते मांसदृशा यद्येव सा शिला ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि मांसमय दृष्टि से दूरपर स्थित
वस्तु के सदृश आपाततः देखी जाय, तो वह केवल अकेली शिला ही देखने में आयेगी, उसमें कुछ
भी सर्ग दिखाई नहीं पड़ेगा