Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
तथैव सुषिराकार इव नानार्थसुन्दरम् ।
पुनरन्यं तथैवाहं प्रदेशं परिदृष्टवान् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी तरह फिर मैंने उसके अन्य प्रदेश को भी देखा, तो वह भी उसी प्रकार से
अनेक तरह की सृष्टियों के आडम्बरों से परिपूर्ण ही था