Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
बुद्ध्यैव दृश्यते नाक्ष्णा परया विविधाकृति ।
क्वचित्प्रथमसर्गात्म जायमानप्रजापति ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
उस उस प्रदेश में जो जो विशेष विशेष देखा, अब उसे दशति हैं ।
कहीं पर प्रारम्भिक सृष्टि के लिए प्रजापति पैदा हो रहे थे, तो कहीं पर प्रजापति द्वारा सूर्य, चन्द्र
आदि नक्षत्रमण्डल, दिन और रात की कल्पना की जा रही थी