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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

अपरिम्लानधर्मत्वात्स्वप्रकाशाखिलव्रजम् । क्वचित्किंचिच्च पूर्वान्यसंनिवेशक्रमस्थिति ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर जगत्‌ अपूर्व वेद एवं शास्त्र के अर्थो के अनुसार आचरण तथा विचार में तत्पर दिखाई दिया तथा कहींपर महाप्रलय के क्षोभ से रहित अतएव सुन्दर निश्चलरूप से स्थित दिखाई पड़ा