Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
क्वचिच्च भ्रष्टदनुजैरमरैरेव पालितम् ।
जिष्णुयुक्तेन गुप्तेन विष्णुपाण्डवकौरवैः ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
कहीं पर
जगत् में अर्जुनयुक्त स्वजनपालक कृष्ण से पाण्डव तथा कौरवों के द्वारा महाभारत-युद्ध से
अनेक अक्षौहिणियों का विनाश किया जा रहा था