Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
तान्येवान्यानि चान्यानि समानि विषमाणि च ।
आवृत्तिमन्ति तान्येव तथैवान्यानि चाभितः ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
चारों ओर भूत उसी रूप से घूमते हैं और अन्य रूप से
भी घूमते हैं, अन्य क्या कहें ये भूत जगत्-रूपी सागर के जलकणरूप ही हैं, यह आप जानिये