Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 86, Verse 57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 86, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 86 · श्लोक 57
संस्कृत श्लोक
तैरेव केचिज्जायन्ते भूयोभूयः शरीरिणः ।
अर्धैस्तैः सदृशाः केचित्केचित्पादेन तैः समाः ॥ ५७ ॥
हिन्दी अर्थ
कोई जीव पूर्व के उन धन आदि से आधे समान होकर
आते हैं और कोई चतुर्थाश से समान होकर आते हैं, तो कोई जीव ठीक वे ही (उसी शरीर के )
बनकर आते हैं और कोई अन्य शरीर धारणकर बिलकुल असमान होकर आते हैं। इससे जीवों की
एकता होने पर शरीर भी समान ही होने चाहिए, यह नियम नहीं है