Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 87, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
ततोऽहं बुद्धवान्रूपं तनु तेजःकणाकृति ।
तदेव भावयन्पश्चाद्गतोऽहं स्थूलतामिव ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद चिति के प्रतिबिम्ब की व्याप्ति से तेज के कण की तरह आकृतिवाले सूक्ष्म
लिंग शरीर का मैंने अनुभव किया और फिर उसी सूक्ष्म शरीर की भावना करते करते मैं स्थूलदेहता
को प्राप्त हुआ