Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 62

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 87, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

तृणौघतनुरोमाढ्यं गिरिखण्डकगुल्मकम् । दिग्वारणकटव्यूहधृतं शेषशिरःशतैः ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

भूषीठ रूप मैं दिग्गजों के मस्तक समूहों तथा शेषनाग के हजार सिरों से थामा गया, तृणों के समुदायरूप सूक्ष्म रोमों से खूब ठका गया और गुल्मरोग की गाँठो की तरह पर्वतो के समूह मुझ में दिखाई देने लगे