Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 87, Verse 66
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 87, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 87 · श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
भूतपूर्वैः परापूर्णं परिपूतं महार्णवैः ।
अलंकृतं पुष्पवनैः समारब्धं रजोघनैः ॥ ६६ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले पैदा हो चुके महासागरों से
प्रलयकाल में बिलकुल परिपूर्ण, परन्तु इस समय तो स्नानकर ऊपर आये हुए के समान सब ओर
से मैं पवित्र, पुष्पों की वन मालाओं से अलंकृत तथा चन्दन की जगह पर स्थित सघन धूलियों से
लिप्त था