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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 88, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 88, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 88 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

क्वचिन्नदनदीवाहहेलानिकषघर्घरम् । क्वचिदङ्कुरकार्याङ्गसिक्तबीजस्य जृम्भणम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर नद, नदी आदि के प्रवाहों के खेलपूर्वक परस्पर संघर्षो से घर-घर ध्वनि हो रही थी, कहीं पर अंकुर आदि की उत्पत्ति नहर, रहट आदि यन्त्रो से सीचे गए खेत मेँ धान आदि बीजों का वर्धन हो रहा था