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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 88, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 88, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 88 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

क्वचिदग्निमहादाहदग्धदेहोग्रवेदनम् । क्वचिज्जलप्लवालूनपुरपत्तनखण्डकम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

कहीं पर अग्नि के महादाह से देहों के जल जाने के कारण लोग उग्र वेदना से छटपटा रहे थे, कहीं पर जल की बाढ़ से नगर एवं कसबों के कुछ हिस्से छिन्न-भिन्न हो गये थे