Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 89, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अहमेव समग्राणि तेषामन्तर्गतान्यपि ।
तेन तान्यनुभूतानि तथा दृष्टानि चाखिलम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
वे सत्तासामान्यरूप हैं,
इसी कारण वे ओर उनके भीतर विद्यमान सब वस्तुएँ मैं ही हूँ, यों धारणा बोधकर मेने मनसे उनका
अनुभव किया ओर साक्षी दृष्टि से निःशेष दर्शन भी किया