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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 89, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

चिदाकाशमहं शुद्धं तस्य मे तत्पदात्मनः । यच्चिन्मात्रात्मकचनं तत्संकल्पाभिदं स्मृतम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, मैं शुद्ध चिदाकाश ही हूँ, उस चिदाकाशरूप मुझमें जो चिदात्मा का कुछ स्फुरण हो जाता है, उसीका नाम संकल्प कहा गया है