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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 89, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

तन्मनस्तन्महीपृष्ठं तज्जगत्स पितामहः । संकल्पपुरवद्व्योम्नि कचत्येतन्मनोनभः ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

वह (प्रसिद्ध) मन, वह भूमण्डल, वह जगत्‌ और वह (प्रसिद्ध) पितामह ये सबके सब चिदाकाश में, आकाश में संकल्पनगर के सदुश, केवल मनरूप नभ स्फुरित होते हैं, अतः ये मनोमय ही हैं