Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 89, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 89, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 89 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
एवं संकल्पमात्रं मे मनोमात्रं तदाततम् ।
धारणाभ्याससंपुष्टं भूमण्डलमिति स्थितम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह वह जो कुछ
मैं बन गया, वह सब मेरा संकल्प था, अतः वह विस्तृत मनोरूप ही रहा । केवल धारणाभ्यास से
पुष्ट होकर वह भूमण्डल होकर स्थित हो गया था