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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 9, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 9, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 9 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

नाहमस्तीति चिद्रूपं चितौ चेल्लग्नमङ्ग ते । न चान्यच्चेतितं ब्रह्म रूपं केनोपमीयते ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे विद्याधर, यह अहंपदार्थ बिलकुल नहीं है, यों अहंकार का त्यागकर यदि तुम्हारा चिद्रूप चिति में पूर्ण ऐक्य को प्राप्त हो जाय, तो बताओ तो सही, तुम्हारे सिवा भला ऐसी प्रकाशित कौन-सी दूसरी वस्तु है, जिससे कि किसी अन्य के साथ ब्रह्मरूप तुम्हारी उपमा दी जाय ?