Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
वारिधारणया वारि भूत्वा जडमिवाजडम् ।
समुद्रमन्दिरेष्वन्तश्चिरं गुलगुलायितम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, मैं यद्यपि चेतनरूप ही हूँ, फिर भी मैं
जलधारणा से जड़रूपसा बन गया। तदनन्तर जलरूप होकर मैंने समुद्ररूपी मन्दिरों के भीतर
दीर्घकाल तक गुड़-गुड़ शब्द किया