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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

तृणवृक्षलतागुल्मवल्लीनां स्तम्भनाडिषु । मृद्वलक्षितमारूढं तवाङ्गेष्विव यूकया ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे आपके अंगो में जँ आदि नजर बचाकर मन्दगति से चढ़ जाती है, ठीक ऐसे ही मैं तृण, वृक्ष, लता, गुल्म, वल्ली आदि के डण्ठलों में मन्दगति से छिपे-छिपे चढ़ गया