Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
वल्लीतमालतालादिपल्लवेषु फलेषु च ।
विश्रम्य पुष्टयाऽऽकृत्या रेखाविरचनं कृतम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
लताओं ओर तमाल, ताल आदि पेड़ों के पल्लवो तथा फलों में रसरूप से
विश्राम कर काल से पुष्ट (उन-उन पत्ते आदि के) आकारों द्वारा भीतर शिरा आदि रेखाओं की
रचना भी मैंने की