Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 15
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हिन्दी अर्थ
तनिक भी खेद (थकावट) का अनुभव न करनेवाले हिमकणका रूप धारण किये हुए
मैंने एक ही समय में समस्त दिशाओं में सम्पूर्णं पल्लवरूपी शय्याओं पर शयन भी किया