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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

विदाऽविदनुसंधानाज्जडेन तदनाश्रयात् । जडाशयेषूल्लसितं जलेनावर्तवर्तिना ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

सदश वर्तन करता हुआ खूब उल्लास करता रहा