Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
मया दुष्कृतिनेवोर्ध्वशिलास्वस्थेन भूभृताम् ।
स्वावर्तवर्तिना श्वभ्रपातेषु शतधा गतम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रायश्चित्त के निमित्त भृगुपतन में प्रवृत्त
हुए पापी के सदृश पर्वतं की ऊपर की शिलाओं से गिर रहे निर्झररूप मैंने गर्तपातों में जीर्ण -शीर्णं
होकर हजारों रूपों से स्थिति प्राप्त की