Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
विश्रान्तमभ्रपीठेषु विद्युद्वनितया सह ।
भिन्नेन्द्रनीलनीलेन शेषाङ्गेष्विव शौरिणा ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
काटी हुई इन्द्रनील मणि के सदृश नीलवर्णवाले भगवान् विष्णु लक्ष्मीजी के साथ शेषनाग
के अंगों पर विश्राम करते हैं, वैसे ही मेघों की पीठपर नील वर्णवाले मैंने भी विद्युतरूपी वनिता
के साथ विश्राम किया