Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
चतुर्दशप्रकाराणां भूतानामङ्गसन्धिषु ।
उषितं चेतनेनेव जडेनाप्यजडात्मना ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र,
यद्यपि मैं यथार्थ में अजड़रूप ही हूँ, फिर भी कल्पनावश जड़ जलरूप होकर मैं ने चौदह प्रकार के
प्राणियों के अंगो की सन्धियों में चेतन की नाईं निवास किया