Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
सीकरोत्कररूपेण रथमारुह्य मारुतम् ।
आमोदेनेव विहितं विमलव्योमवीथिषु ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
राघव, मैंने जलकणका रूप
भी धारण किया था । उस रूपको धारणकर मैंने पवनरूपी रथपर चढ़कर निर्मल आकाश के मार्गों
में, आमोद के सदुश, जनाह्नाद ओर विहार किया