Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
राम तस्यामवस्थायां परमाणुकणं प्रति ।
अनुभूतमशेषेण यथास्थितमिदं जगत् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ भी परमाणु तक की स्री वस्तुओं में हर एक जगह. वाकी की शिलाके सदश, सृष्टियों
का मैंने अनुभव किया, यह कहते हैं /
हे रामजी, जलधारणाकाल में भी मैंने प्रत्येक परमाणु कण में पूर्णरूपसे यथास्थित इस
जगत् को देखा