Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 90, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 90, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 90 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अजडेन जडेनेव समया जालया तया ।
अन्तःसर्वपदार्थानां ज्ञाताज्ञातेन संस्थितम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र जल को विषय करनेवाली एकरूप उस जलधारणा से स्वयं
अजड़ होता हुआ भी जड़ जल-सा बनकर तथा सब पदार्थों के भीतर ज्ञातारूप होता हुआ
मैं अज्ञातरूप से स्थित रहा