Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
केदारं दिनसस्यानां तमोच्छूनामनुग्रहः ।
नभःकाचबृहत्पात्रक्षालनाम्बु समुल्लसत् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
दिवसरूपी धानो के लिए वह क्यारी है, तमसे (अन्धकार से)
आक्रान्त रूपादिके लिए तो वह साक्षात् दया की मूर्ति ही है और गगनरूप महान् काँचपात्र के लिए
प्रक्षालनार्थ अतिस्वच्छ जल है