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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

सत्ताप्रदतयार्थानां प्रकाशकतयापि च । चिन्मात्रपरमार्थस्य सहोदर इवानुजः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

तेज पदार्थों मेँ सत्ता का प्रदान करनेवाला तथा उनको प्रकाशित भी करनेवाला है, इसलिए चिन्मात्ररूप जो परमार्थ वस्तु है, उसका एक तरह से वह सहोदर, छोटा भाई हे । छोटा भाई इसलिए है कि जड़ होने के कारण वह उससे जघन्य है