Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
क्रियाकमलिनीभानुर्भूतलोदरजीवितम् ।
रूपालोकमनस्कारचमत्कारश्चितेर्यथा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
तेज क्रियारूप कमलिनी के लिये सूर्य है ओर भूतल के हृदय का जीवन है । चाक्ुषवृत्ति ओर मानस
वृत्ति के ऊपर आरूढ चिति का जैसे विषयगत अज्ञान की निवृत्ति करना चमत्कार है, वैसे ही इस
तेज में भी विषयावरण अन्धकार की निवृत्ति करना चमत्कार है