Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
कपोलबाहुनेत्राक्षिभ्रूकरालकलासकः ।
निजोऽजेयतया जातो विलासः कामिनीजने ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
कामिनीजनों में मेँ कपोल,
बाहु, नेत्र, भौंह, हाथ, केश आदि को अति सुन्दरता से प्रकाशित करनेवाला, सर्वत्र अचेतरूप से
प्रसिद्ध स्वाभाविक काम का विलास बन गया