Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

नित्यं सत्त्वप्रधानत्वात्प्रकाशाकृतिराजगत् । सर्वं दृश्यमृते सर्वचौरध्वान्तप्रतापयुक् ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

हुए पदार्थों को छोडकर भाग रहे चोरों पर राजा प्रतापी होता है