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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

दीपादिभिः शनैः स्निग्धैर्दशाशतविहारिभिः । प्रत्यक्षीकृतसर्वार्थं प्रतिगेहं सुराजवत् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे श्रेष्ठ राजा तरह-तरह की वेशभूषा से परिभ्रमण करनेवाले स्नेहयुक्त गुप्तचरों द्वारा सबके घर का वृतान्त प्रत्यक्ष कर लेता है, वैसे ही हजारों बत्तियों से विहार करनेवाले तेलयुक्त दीपक आदि के द्वारा धीरे से मेने प्रत्येक घर में प्रत्येक पदार्थ को प्रत्यक्ष कर लिया है