Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
कामोत्पले कोशचक्रं वाडवं तिमिरार्णवे ।
ब्रह्माण्डसदने दीपं वृक्षं दिनफलावलेः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरा सूर्यस्वरूप चन्द्र
की कामना करनेवाले कुमुदों के लिए कोशबन्धन का हेतु चक्र बना, अन्धकाररूपी समुद्र के लिए
बडवाग्नि, ब्रह्माण्डरूपी घरके लिए दीपक और दिनरूपी फलसमूह के लिए वृक्ष बना