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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

रसायनह्रदाकारमिन्दुत्वं वदनं दिवः । निशानिशाचरीहासं विकासं रजनीविशाम् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसी तरह मैं चन्द्ररूप भी बन गया। मेरा चन्द्र का जो स्वरूप हुआ, उसका आकार अमृत से लबालब भरी झील के सदृश था, वह स्वर्ग का मुख के सदृश हास था तथा रात्रि में प्रवेश करनेवालों का प्रकाशकर्ता था