Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
जगल्लावण्यलक्ष्मीणां सर्वासामुपमास्पदम् ।
रजनीरोहिणीनारीकैरवाणां परं प्रियम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
वह मेरा चन्द्र का रूप समस्त जगत् की सुन्दरतारूपी लक्षिमयों के उपमान
तथा रात्रि, रोहिणीरूपी नारी एवं कुमुदों के लिए उत्तम स्नेह का भाजन था