Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
क्वचिद्दीपतयानीय कलिकाकोमलाङ्गया ।
अन्तःपुरेषु कान्तानां सुरतालोकनं कृतम् ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
मैंने कहीं दीपक रूप भी ले लिया । दीपक के रूप में जब मेरी
अन्तःपुर में स्थापना हुई, तब रमणियों की सुरतक्रीडा का भी मैंने अवलोकन किया। दीपक के रूप
में पुष्प कलिका के सदृश मेरे कोमल अंग खूब शोभते थे