Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
क्वचिद्विद्युत्तया तेषु शफर्या चार्णवेष्विव ।
खस्थेषु विकृतं चारु वार्यावर्तविराविषु ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
जल के आवर्तों
से शब्दायमान आकाशस्थ मेघों में विद्युत का रूप लेकर मैंने समुद्र में मछली के सदुश अत्यन्त
सुन्दर ढंग से चेष्टाएँ कीं