Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
हतेन शस्त्रपाषाणैरयःपिण्डादिवासिना ।
हन्तृदाहार्थमुद्गीर्णाः कणकोपलताः क्वचित् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
लोहार आदि कारीगरों
की प्रयोगशालाओं में लोहपिण्डों में रहकर मैने मुद्गर तथा पत्थरों से ताडित होकर ताडन करनेवाले
को जलाने के लिए चिनगारियाँ तथा पत्थर के छोटे छोटे कंकड उगले