Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 91, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 91, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 91 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
क्वचिन्महाशिलाकोशे पाषाणमणिना मया ।
समस्तभूतादृश्येन स्थितं युगशतान्यपि ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, कहीं पर मैंने
बड़ी बड़ी चट्टानों के अन्दर पाषाणमणिका (हीरा, पन्ना आदि का) रूप लेकर समस्त भूतों की
दृष्टि से ओझल होकर सैकड़ों युग तक वास किया